आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर शनिवार सुबह प्राइवेट बस की तेज रफ्तार व चालक की लापरवाही ने चार मासूमों समेत पांच लोगों की जान ले ली।
बिहार के लखनौर के खरघेरी निवासी रामविनोद यादव (35) परिवार के साथ गुरुग्राम में रहते हैं।हादसे में रामविनोद के बेटे इंद्रकुमार (6) व नंदिनी (8) की मौत हो गई। बिहार के फुलपरास निवासी विष्णुदेव (35) भी गुरुग्राम में प्राइवेट नौकरी करते हैं। 20 मई को उनकी साली रीवा की शादी है। शादी में शामिल होने के लिए वह पत्नी सुनीता व बच्चों के साथ बिहार जा रहे थे। हादसे में उनके बेटे मनीष (8) व नितेष (12) की मौत हो गई। जबकि रामविनोद, उसकी पत्नी बेबी व तीन साल की बेटी वंदना घायल हो गई। घटनास्थल से पुलिस ने बच्चों के शव हटवा दिए थे। जबकि घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। बांगरमऊ सीएचसी से बेबीदेवी व सुनीता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। जिला अस्पताल में जब बेबीदेवी व सुनीता को होश आया तो उन्होंने सबसे पहले अपने आसपास बच्चों को देखा। बच्चों को न देख वह बिलख पड़ी।इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें संभाला व बच्चों के सुरक्षित होने का आश्वासन दिया। इस बीच दोनों महिलाएं अपने बच्चों को बार बार पास बुलाने की मांग करती रही। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हादसे की सूचना मिलते ही बांगरमऊ व उसके आसपास के क्षेत्र में संचालित एंबुलेंस को बांगरमऊ सीएचसी बुला गया था।प्राथमिक उपचार के बाद छह एंबुलेंसों से घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। पूर्व में सूचना मिलते ही अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी सक्रिय हो गए थे। एंबुलेंस पहुंचते ही आनन फानन घायलों को इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया। इस काम में पुलिसकर्मी भी पीछे नहीं रहे।सदर कोतवाली प्रभारी दिनेश चंद्र मिश्रा, ललऊखेड़ा चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार व कई अन्य सिपाहियों ने खुद घायलों को एंबुलेंस से बाहर निकाला व उन्हें लेकर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचे। सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि घायलों को समय से अस्पताल पहुंचाया जा सके इसके लिए हसनगंज के एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस, बांगरमऊ, नानामऊ, गंजमुरादाबाद, तकिया चौकी व फतेहपुरचौरासी की 108 एंबुलेंस को भी बांगरमऊ अस्पताल बुला लिया गया था।इन्हीं एंबुलेंस से गंभीर रूप से घायल लोगों को कानपुर रेफर किया गया था। एक साथ बड़ी संख्या में घायलों के अस्पताल पहुंचने की सूचना पर सीएमएस ने स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट कर दिया था। ओपीडी से भी कई डॉक्टरों को इमरजेंसी वार्ड बुला लिया गया था। इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को वार्ड में शिफ्ट किया गया।

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