फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट बिल (FRDI) के कारण लोगों के मन में उठी चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट करते हुए कहा कि सरकार वित्तीय संस्थाओं और बैंकों के डिपॉजिटर्स के हित को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह से डटी हुई है. उन्होंने कहा कि यह बिल फिलहाल स्टैंडिंग कमिटी के पास लंबित है.

सरकार ने इस बिल को लेकर सोशल मीडिया और मुख्य धारा की मीडिया में चल रही खबरों को अफवाह करार दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा कुछ भी नहीं करने जा रही है. वित्त मंत्री ने बताया कि बैंकों के डिपॉजिटर्स को वर्तमान में मिल रहे अधिकारों को न सिर्फ सुरक्षित किया जाएगा बल्कि उसे और मजबूती प्रदान की जाएगी.

सरकार नहीं आने देगी आम लोगों के पैसों पर आंच

वित्त मंत्री के ट्वीट के बाद इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी एससी गर्ग ने भी इस मुद्दे पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि एफआरडीआई बिल में ऐसी कोई तब्‍दीली नहीं की जा रही है, जिससे बैंकों में जमा लोगों के पैसों पर आंच आए. उन्‍होंने साफ कहा कि पीएसयू बैंकों में जमा लोगों के पैसे की गारंटी सरकार देती है, इसलिए उसकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं आ सकती है.

पहले ये बातें चल रही थी कि शीतकालीन सत्र में सरकार एक ऐसा बिल लाने वाली है कि सरकार अब बैंकों को बेलआउट नहीं करेगी. अभी तक हर बार ऐसा होता है कि एनपीए बढ़ने के बाद बैंक सरकार की शरण में आ जाते थे और सरकार बॉन्ड खरीदकर बेलआउट करती थी. इस बिल के बारे में यह कहा जा रहा था कि अब सरकार का फोकस बेलआउट की जगह बेल-इन पर होगी. इसमें ज्यादा एनपीए वाले बैंकों को अपने बेलआउट का इंतजाम खुद करना होगा. इस वजह से लोगों में यह डर पैदा हुआ कि इस सूरत में बैंकों को अपने बेलआउट का इंतजाम बैंक में जमा रकम से करनी होगी. यानी बैंकों में ग्राहकों का जो पैसा होगा, उसका एक हिस्सा बैंक अपने बेलआउट में करेगी.