डेमो तस्वीर

बाँदा-चेक बाउंस के मामले में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपित को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाते हुए दो लाख 90 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यदि अर्थदंड अदा न किया तो एक माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।

जानकारी के मुताबिक कोतवाली थाना क्षेत्र के डीएम कालोनी गली नंबर-1 निवासी सेवानिवृत्त फौजी रामनारायन सिंह पुत्र अरविद सिंह ने मोहल्ला मर्दननाका निवासी इफ्तिखार हसन खां पुत्र हसन अहमद खां जो उप कृषि निदेशक के यहां कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है । रामनारायण ने इफ्तिखार को 2 लाख 50 हजार का कर्ज दिया था। रामनारायन सिंह ने बताया कि विपक्षी कर्मचारी का निकाह तय हो गया था। उसे पैसों की सख्त जरूरत थी । इस पर उसने 2 लाख 50 हजार रुपये उधार लिये थे। राम नारायण ने जब अपने रुपयों की मांग की। तब उसने 30 दिसंबर 2016 को 2 लाख 50 हजार का चेक दिया। जिसको उसने अपने खाते स्टेट बैंक सिटी बांदा शाखा में लगाया। जो वापस होकर 15 फरवरी 2017 को वापस हुआ। तब उसने विपक्षी को फोन के द्वारा सूचना दी कि तुम्हारे खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं है। चेक बाउंस हो गया है। विपक्षी को सूचना देने के बाद विपक्षी ने कहा कि वह पुन: अपने खाते में पैसा डाल रहा है। तब परिवादी ने 21 अप्रैल 2017 को अपने खाते में चेक लगाया। यह चेक 27 अप्रैल 2017 को पुन: बाउंस हो गया। परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से 3 मई 2017 को नोटिस भिजवाया। नोटिस का जवाब न मिलने पर 30 मई 2017 को अदालत में मुकदमा प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट रामकिशोर तिवारी विपक्षी इफ्तिखार हसन को दोषी पाते हुए एक वर्ष का कारावास, 2 लाख 90 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है। फ़िलहाल आरोपित को अपील प्रस्तुत करने का लाभ देकर उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।

 

कुछ जानकारी चेक बाउंस कानून की :-

दोषी पार्टी को लीगल नोटिस के मिलने के बाद जवाब देने (पैसे वापस करने) या आवश्यक कदम उठाने के लिए वैधानिक रूप से 15 दिनों का समय दिया जाता है।

किसी तरह के जवाब न देने और दोषी पार्टी की तरफ से कोई भी कार्यवाही ना होने की स्थिति में, पीड़ित पक्ष धारा 138NI के तहत 15 दिन ख़त्म होने से 30 दिनों के अन्दर दोषी पार्टी पर चेक बाउंस का अपराधिक केस कर सकती है ( दोषी पार्टी द्वारा क़ानूनी नोटिस प्राप्त होने के 45 दिनों के अन्दर )|

 

आपका चेक बाउंस होने के मामले में कानूनी उपाय

चेक बाउंस भारत में एक दण्डनीय अपराध है, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्निहित है। निम्नलिखित जानकारी आपके चेक बाउंस होने पर कौन से कदम उठाए जाने के संबंध में एक उपयोगी मार्गदर्शिका का कार्य करेगी: –

 

पहला कदम: मांग नोटिस:

एक बार बैंक द्वारा चेक वापस कर दिया गया है, तो आहर्ता के खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज करने से पहले, आपको बैंक द्वारा चेक वापस लौटाए जाने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के भीतर उस आहर्ता को एक मांग पत्र / कानूनी नोटिस भेजना होगा। पत्र में आहर्ता से राशि की मांग तथा राशि का निर्धारित अवधि (आमतौर पर 15 दिन) के भीतर भुगतान नहीं होने की स्तिथि में परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई का उल्लेख भी होना चाहिए ।

 

हालांकि इस नोटिस के लिए कोई निर्धारित प्रारूप नहीं है, इसका उद्देश्य भुगतान की मांग करना और भुगतान नहीं करने की स्थिति में जारीकर्ता के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने के बारे में स्पष्ट रूप से जारीकर्ता को सूचित करना है। इसके अलावा, इस तरह के पत्र के वितरण का सबूत ध्यान से संरक्षित किया जाना चाहिए। मांग पत्र स्वयं शिकायतकर्ता द्वारा भेजा जा सकता है। हालांकि, संबंधित व्यक्ति को भेजने से पहले किसी चेक बाउंस विशेषज्ञ वकील द्वारा इसके निरीक्षण की सलाह दी जाती है।

मांग पत्र में निम्नलिखित जानकारी स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए: –एक कथन, कि चेक को उसकी वैधता की अवधि के भीतर प्रस्तुत किया गया था।

  • ऋण का विवरण या कानूनी तौर पर लागू करने योग्य दायित्व।
  • बैंक द्वारा दी गयी चेक की अस्वीकृति के बारे में जानकारी।
  • पत्र प्राप्त करने के 15 दिनों के भीतर जारीकर्ता को राशि का भुगतान करने की मांग करना।

दूसरा कदम:  शिकायत प्रारूपण:

अगर आहर्ता ने मांग पत्र के वितरण की तारीख से 15 दिनों की अवधि के भीतर मांग पत्र का जवाब नहीं दिया है या आपकी राशि का भुगतान करने से इनकार कर दिया है, तो इस तरह के मामले में उपलब्ध अगला विकल्प 30 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर अदालत में एक शिकायत दर्ज करना है। कानूनी शिकायत दर्ज करने से पहले, यह समझना महत्वपूर्ण है कि आप ऐसे मामलों में किस न्यायालय से संपर्क करें। आप किसी ऐसी अदालत में शिकायत दर्ज कर सकते हैं जिसके क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं में निम्न में से कोई भी घटना घटित हुई हैं:

 

  • जहां चेक आहृत किया गया था।
  • जहां चेक प्रस्तुत किया गया था।
  • जहां बैंक द्वारा चेक वापस किया गया था।
  • जहां आपके द्वारा मांग पत्र भेजा गया था।

आपके पास सभी निम्नलिखित दस्तावेज़ होने चाहिए: –

शिकायत,शपथ पत्र,सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी जैसे चेक, मेमो, नोटिस कॉपी, और पावती रसीद।

तीसरा कदम: मामले को दाखिल करने के लिए अदालत की प्रक्रिया:

  1. शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर के साथ मुक़दमा दाखिल करने के समय में वकील का ज्ञापन आवश्यक है।
  2. अदालत में मामला दायर होने के बाद, सभी दस्तावेजों की प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच की जाती है, इसलिए मूल दस्तावेज जैसे मूल चेक (बाउंस), मूल ज्ञापन, नोटिस की प्रति, डाकघर की प्राप्ति रसीद, यूपीसी की स्वीकृति रसीद, दुतरफी पड़ताल के समय आवश्यक होती है।
  3. इस स्तर पर सीमा की अवधि भी सत्यापित की जाती है ।
  4. प्रक्रिया फॉर्म जिसे भट्टा के नाम से भी जाना जाता है, शिकायतकर्ता या वकील द्वारा आरोपी के पते के साथ दायर किया जाता है।
  5. तब न्यायालय आरोपी को समन जारी करता है कि वह विशिष्ट तिथि पर अदालत में पेश हो।
  6. यदि अभियुक्त सुनवाई की तारीख में अदालत में नहीं पेश होता है, तो अदालत शिकायतकर्ता के अनुरोध पर जमानती वारंट जारी कर सकती है।
  7. यदि अभियुक्त फिर भी अदालत में पेश नहीं होता है, अदालत उसकी गिरफ्तारी का गैर-जमानती वारंट जारी कर सकता है।

 

 

Loading...