शेयरों में किए जाने वाले निवेश पर होने वाली कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स लगाए जाने के बाद बाजार में मचे कोहराम की वजह से महज दो कारोबारी सत्र के भीतर निवेशकों के करीब पांच लाख करोड़ रुपये की रकम स्वाहा हो गई।

बजट पेश किए जाने के बाद के दो ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स में जहां 1150 अंकों की गिरावट आई है वहीं निफ्टी में करीब 350 से अधिक अंकों की गिरावट आई है।

सोमवार को सेंसेक्स जहां 309.59 अंक टूटकर 34,757.16 अंक पर बंद हुआ वहीं शुक्रवार को इसमें भारी 839.91 अंक की गिरावट आई थी।

बाजार में हो रही लगातार बिकवाली से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में5 लाख 4 हजार 253 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह अब कम होकर 1,47,95,747 करोड़ रुपये हो गया।

10 फीसदी एलटीसीजी टैक्स की घोषणा और चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के मुकाबले राजकोषीय घाटे का अनुमान बढ़ाकर 3.5 फीसदी किए जाने से निवेशकों के सेंटीमेंट को झटका लगा है, जिससे बाजार अभी तक उबर नहीं पाया है।

जियोजित फाइनैंशिलय सर्विसेज में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा, ‘बॉन्ड यील्ड और कमजोर वैश्विक संकेतों की वजह से बाजार में चिंताएं हैं और इस वजह से बिकवाली जारी है। बाजार के लिए अब अगला ट्रिगर आरबीआई की मौद्रिक नीति होगी। हालांकि बाजार को इस बात की उम्मीद है कि आरबीआई यथास्थिति बनाए रखेगा लेकिन राजकोषीय घाटे और यील्ड पर की गई कोई टिप्पणी उतार-चढाव को बढ़ा सकती है।’

हालांकि सरकार का मानना है कि बाजार में आई गिरावट की वजह एलटीसीजी कर लगाया जाना नहीं बल्कि वैश्विक संकेत हैं।

वित्त एवं राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि शेयरों से कमाई पर सिर्फ 10 फीसदी एलटीसीजी लगाया गया है, जिससे शेयरों में निवेश अभी भी आकर्षक बना हुआ है।