ग्राहकों के खून पर खड़ा कॉरपोरेट गैंग

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लखनऊ। क्या आप खरीदना चाहेंगे ऐसा घर, मकान, फ्लैट या व्यवसायिक स्थान जो मासूम मजदूरों और व्यापारियों के उत्पीड़न और खून से सना हो ?? क्या खुश रह पायेंगे आप के बच्चे उस घर में जहां की एक एक ईंट गरीब और मजलूमों की आहों और चीखों से हमेशा जुड़ीं रहेंगी ? इसलिये जब भी किसी मकान या प्रॉपर्टी को आपने बच्चों के लिये खरीदें तो उस प्रोजेक्ट को बनाने वाले के बारे में जरूर मालूम कर लें, वर्ना आपका पैसा और खुशियाँ दोनों ही ये कार्पोरेट्स गैंग्स लूट सकते हैं ।

पिछले दशक में ज्यों ज्यों विकास के पहिये ने रफ्तार पकड़ी वैसे वैसे लखनऊ शहर में नए नए मॉल, रिहायशी कालोनी, व्यवसायिक बहुमंजिला मॉल भी बनने लगे। इस इंडस्ट्री में बहुत से शहर और बाहर से आकर शहर में बसे, नये पुराने जमीन कारोबारियों ने जम कर चांदी काटी, कुछ ने पैसे की दम पर ज़मीनों और प्रॉपर्टी पर कब्जे किये तो कुछ ने गुंडई और नेतागीरी के दम पर। लखनऊ के विकास में शहीद पथ मील का पत्थर साबित हुआ और उसके दोनों ओर बसने वाली योजनायें इन कार्पोरेट्स गैंग्स के लिये बहुत बड़ा वरदान बनी.

धीरे धीरे समय बदला और इन्ही प्रॉपर्टी के दलालों, नेताओं और बाहुबलियों के गठजोड़ ने अपने गैंग को नई शालीन शक्ल देना शुरू कर दिया और जन्म दिया प्राईवेट लिमिटेड कम्पनियों को और कुछ नये धनकुबेरों ने एक नहीं दसियों कम्पनियाँ बना कर काले धन को सफेद करना शुरू कर दिया। रातों रात पैसों के अम्बार लगने लगे, फिर इसके बाद इस गैंग में एक और ताकत का गठजोड़ हुआ, वह ताकत थी सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों की.

अब तक इन लोगों के काम करने और पैसा कमाने के तौर तरीकों में काफी बदलाव आ चुका था। अब पहले की तरह एक ही आदमी को सारे काम नहीं करने होते थे। सभी के अपने अपने क्षेत्र और रोल बॉट दिये गये। मोटी मोटी तन्ख्वाह का लालच देकर CEO, CFO, GM, PM जैसे पदों पर कॉरपरेट जगत के अधिकारि‍यों की नियुक्ति की जाने लगी। जिनका पहला काम मासूम और कमजोर व्यापारियों, ठेकेदारों, खरीददारों को बहला और फुसला कर, बड़े बड़े सब्जबाग दिखा कर शिकार बनाना और फिर जब आर्थिक रूप से फंस जायें तो अपने मालिकों की ऊँची ऊँची आधिकारिक पहुंच, ताकत, नेतागीरी और पैसे की ताकत का डर दिखा कर उसके माल और पैसे को हड़प जाना.

ये लोग यहीं तक नहीं रुकते इनका मनोबल इतना बढ़ चुका है कि ये अपने ताकत के नशे में चूर और भ्रष्ट सरकारी अधिकारीयों की मिली भगत की दम पर शासन और प्रशासन अन्य विभाग जिनका भी वास्ता इन गैंग्स से पड़ता है उसको ठेंगा दिखाने से ये बाज नहीं आते। सभी सरकारी कानूनों का उल्घंन तो जैसे इन लोगों का अधिकार बन चुका है। चाहे वह आयकर विभाग हो या GST, प्रॉर्वीडेंट फंड, कर्मचारी बीमा, लोक निर्माण व अन्य विभाग, साथ ही साथ अपने अधीन काम करने वाली कम्पनियों, ठेकेदारों और खरीददारों पर भी धॉधली करने के लिये डरा धमका कर दबाव बनाते हैं। इन कार्पोरेट्स गैंग का बड़े बड़े नेताओं और अधिकारियों की काली कमाई को सफेद करने में भी सबसे महत्वपूर्ण योगदान है और उन्हीं के नाम और पद की ताकत का इस्तेमाल लोगों को लूटने में करते हैं। बहुत जल्द खुलासा होने जा रहा है बड़े बड़े कार्पोरेट्स गैंग्स का, देखते रहिये ख़बरें।

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