उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सरकार में बने गोमती रिवर फ्रंट में वित्तीय घोटालों की जांच अब केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने शुरू कर दी है। सीबीआई ने इस मामले में प्रोजेक्ट से जुड़े 8 इंजीनियरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।

गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये है। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया, केंद्रीय जांच एजेंसी ने जिन इंजीनियरों के खिलाफ गुरुवार को मामला दर्ज किया, उनके नाम गुलेश चंद, एस. एन. शर्मा, काजिम अली, शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और सुरेंद्र यादव हैं। गुलेश चंद्र, शिव मंगल यादव, अखिल रमन और रूप सिंह रिटायर हो चुके हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 20 जुलाई को इस परियोजना की सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसकी शुरुआती लागत 656 करोड़ रुपये थी लेकिन बाद में इसे संशोधित कर 1,513 करोड़ रुपये कर दिया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर न्यायमूर्ति आलोक सिंह को मामले की जांच के लिए नियुक्त किया था। जस्टिस सिंह ने जून में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी।

जस्टिस सिंह ने कथित तौर पर इस परियोजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और वित्तीय दुरुपयोग पाया और परियोजना से जुड़े अधिकारियों पर भी सवाल उठाए थे।

बाद में एक समिति का गठन किया गया जिसमें उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुरेश खन्ना, राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष प्रवीर कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अनूप चंद्र पांडे और तत्कालीन प्रधान सचिव (विधि) रंगनाथ पांडे शामिल थे। केंद्र ने 24 नवंबर को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।